Anmol Suvichar - Hindi Quotes

Best Collection Of Anmol Vachan, Hindi Suvichar, Hindi Quotes Images

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Best Anmol Vachan Hindi Picture – Suvichar On Proud

Hindi Suvichar Anmol Vachan Quotes Wallpaper

 

Best Anmol Vachan Hindi Picture – Hindi Suvichar (Hindi Quotes) On Proud : 

 

न इतराओ इतना, बुलंदियो को छूकर

वक्त के सिकंदर पहले भी कई हुये

जहा होते थे कभी शहंशाहो के महल

देखे है वही अब उनके मकबरे बने हुये ।

Updated: May 15, 2016 — 8:59 am

Hindi Anmol Vachan Suvichar Wallpaper – Inspirational Poetry Images

Inspirational Hindi Suvichar Shayari Wallpaper In Hindi

Hindi Anmol Vachan Suvichar Wallpaper – Inspirational Poetry Images:

Raat kitni bhi ho gehri aur kaali

Subah ka sooraj andhere me khilega

Raah kitni bhi kathin ho ae musafir

Manzilen usko milengi jo chalega

 

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Updated: October 28, 2015 — 11:19 am

Anmol Vachan Pictures In Hindi Font – Hindi Quote Wallpapers

Best Hindi Anmol Vachan Suvichar Quotes Wallpapers

 

Anmol Vachan Pictures In Hindi Font, Hindi Quote Wallpapers And Hindi Suvichar Images : –

मुसीबत में अगर मदद मांगो तो सोच कर मांगना क्योकि…
मुसीबत थोड़ी देर की होती है और एहसान जिंदगी भर का..!!

Musibat Mein Agar Madad Mango To Soch Kar Mangna Kyonki…

Musibat Thodi Der Ki Hoti Hai Aur Ahsaan Zindagi Bhar Ka.!!

 

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Updated: October 10, 2016 — 10:56 am

Hanuman Chalisa In Hindi Font – हनुमान चालीसा हिंदी में

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहि, हरहु कलेस विकार ।।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ।।

राम दूत अतुलित बल धामा ।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी ।
कुमति निवार सुमति के संगी ।।

कचन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुंडल कुंचित केसा ।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेऊ साजै ।।

संकर सुवन केसरीनंदन ।
तेज प्रताप महा जग बंदन ।।

बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुरा ।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लषन सीता मन बसिया ।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लंक जरावा ।।

भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचन्द्र के काज सँवारे ।।

लाय सजीवन लखन जियाये ।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सैम भाई ।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा ।।

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा ।
राम मिलाय राज पद दीन्हा ।।

तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना ।
लंकेस्वर भए सब जग जाना ।।

जुग सहस्त्र जोजन यर भानू ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीँ ।।

दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।।

राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।
तुम रच्छक काहू को डर ना ।।

आयन तेज सम्हारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तें काँपै ।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै ।।

नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरंतर हनुमत बीरा ।।

संकट तें हनुमान छुड़ावैं ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ।।

सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिन के काज सकल तुम साजा ।।

और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोइ अमित जीवन फल पावै ।।

चारों जुग परताप तुम्हारा ।
है परसिद्ध जात उजियारा ।।

साधु संत के तुम रखवारे ।
असुर निकंदन राम दुलारे ।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ।।

राम रसायन तुम्हरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ।।

तुम्हरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ।।

अंत काल रघुबर पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ।।

और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ।।

संकट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरु देव की नाईं ।।

जो सत पार पाठ कर कोई ।
छूटहि बंदि महा सुख होई ।।

जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ।।

दोहा
पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप ।
राम लषन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ।।

Updated: August 3, 2015 — 9:40 am

Hanuman Aarti Hindi Mein – हनुमान आरती हिंदी में

आरती कीजे हनुमान लला की |
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ||

जाके बल से गिरिवर कांपे |
रोग दोष जाके निकट ना जांके ||
अनजनी पुत्र महा बलदाई |
संतन के प्रभु सदा सही ||

दे बीरा रघुनाथ पठाए |
लंका जारि सिया सुधि काये ||
लंका सो कोटि समुद्र की खायी |
जात पवन सुत बार ना लायी ||
लंका जरि असुर संघारे |
सियाराम जी के काज सवारे ||

लक्षमण मुर्षित पड़े सकारे |
लाये सजीवन प्राण उभारे ||
पैठी पाताल तोरि जमकारे |
अहिरावन की भुजा उखारे ||
बाए भुजा असुर दल मारे |
दाहिने भुजा संत जन तारे ||

सुर नर मुनि जन आरती उतारे |
जय जय जय हनुमान उचारे ||
कंचन थाल कपूर लौ छाई |
आरती करत अंजना माई ||
जो हनुमान जी की आरती गावे |
बसि बैकुंठ परमपद पावे ||

Updated: August 3, 2015 — 9:39 am
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